अली वाले जहाँ बैठे वहीं जन्नत बना बैठे / Ali Wale Jahan Baithe Wahin Jannat Bana Baithe

अली वाले जहाँ बैठे वहीं जन्नत बना बैठे / Ali Wale Jahan Baithe Wahin Jannat Bana Baithe फ़क़ीरों का है क्या चाहे जहाँ बस्ती बसा बैठे ‘अली वाले जहाँ बैठे वहीं जन्नत बना बैठे   फ़राज़-ए-दार हो, मक़्तल हो, ज़िंदाँ हो कि सहरा हो जहाँ ज़िक्र-ए-‘अली छेड़ा वहाँ दीवाने आ बैठे   कोई मौसम, कोई … Read more