Ḥashr ke din hamāra kyā hogā
ह़श्र के दिन हमारा क्या होगा वो जो चाहेंगे फै़सला होगा जाने इस दिल का हाल क्या होगा जाना जब शहरे मुस्त़फा़ होगा इस लिए चूमते हैं असवद को उनके होंटों से वो लगा होगा मेरी मरकद में जब वो आएंगे एक लम्हे़ में फ़ैसला होगा सब ही कह देंगे इज़्हबू ग़इरी उनके लब पर … Read more